मीडिया जगत
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क्या तनिष्क विवाद के बाद भी दोहराई जाएगी ‘विवेक’ कथा ?
जब किसी प्रतिष्ठित हिंदू संगठन के सम्मानित व्यक्ति द्वारा केवल एक समुदाय विशेष को लेकर ही इस तरह का कोई…
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जड़ें बहुत गहरी हैं टीआरपी फ़र्ज़ीवाड़े की!
श्रवण गर्ग वरिष्ठ पत्रकार क्या चिंता केवल यहीं तक सीमित कर ली जाए कि कुछ टीवी चैनलों ने विज्ञापनों के…
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अर्णब से अब पूछ रहा है देश, क्या है यह गोरखधंधा?
नई दिल्ली। क्या पता था कि अर्णब के – पूछता है भारत – के लिए तिकड़में की जाती रहीं? चैनल…
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लखनऊ पुलिस ने पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा घर में नज़रबंद किया
लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुल पति प्रोफ़ेसर रूप रेखा ने कहा है कि पुलिस ने उन्हें हाथरस कॉंड को लेकर…
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फर्जी TRP का बड़ा रैकेट लगा हाथ-मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह
मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया है कि फर्जी TRP का रैकेट चल रहा है.…
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THE RDT SHOW : हाथरस कांड सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुँचा?
इस शो में बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम दत्त त्रिपाठी सम सामयिक विषयों पर चर्चा करते हैं. उनसे बात करते…
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बाबरी विध्वंस : सुप्रीम कोर्ट, लिब्रहान और सेशंस कोर्ट के निष्कर्ष में अंतर क्यों?
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सेशंस कोर्ट ने पिछले हफ़्ते सभी अभियुक्तों को बाइज़्ज़त बरी कर दिया . अदालत ने कहा यह घटना सुनियोजित नहीं थी . अदालत ने इस कांड के लिए अराजक तत्वों को ज़िम्मेदार बताया. लाल कृष्ण आडवाणी के बारे में अदालत ने कहा कि वह मस्जिद को बचाने की कोशिश कर रहे थे जबकि वह बाबरी मस्जिद के ख़िलाफ़ आंदोलन के अगुआ थे . इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में इसे आपराधिक कृत्य बताया था और जस्टिस लिब्रहान जॉंच आयोग ने सुनियोजित षड्यंत्र. पढ़िये वरिष्ठ पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी का विश्लेषण. छह दिसम्बर बानवे को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस कुछ अराजक तत्वों द्वारा अचानक हुई घटना थी अथवा यह की सालों के सुनियोजित और संगठित प्रयास का परिणाम था? इतिहास में यह सवाल हमेशा पूछा जाएगा. हमारे वेदों में कहा है कि सत्य का मुख सोने के पात्र से ढका हुआ होता है. सत्य की खोज श्रमसाध्य एवं अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है. सत्य अलग अलग कोण से अलग दिखता और देखने वाले की नज़र से भी. बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्मभूमि प्रकरण में मैं एक दर्शक रहा हूँ. चालीस साल से प्रत्यक्ष और उसके पहले का फ़ाइलों और पुस्तकों के ज़रिए. वास्तव में यह कहानी दिसम्बर उनचास से शुरू होती है, जब रात में पुलिस के पहरे में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियाँ प्रकट हुईं. अथवा जैसा कि पुलिस रपट में है कि चोरी से रखकर मस्जिद को अपवित्र कर दिया गया. विवादित बाबरी मस्जिद अयोध्या एक धर्म के लोगों द्वारा जबरन दूसरे धर्म के प्रार्थना गृह में क़ब्ज़ा. लेकिन सी बी आई उतना पीछे नहीं गयी. सी बी आई की कहानी पिछले शिलान्यास के आसपास शुरू होती है. चार्जशीट में उल्लेख किया गया कि हाईकोर्ट ने …
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हाथरस में साज़िश के मुक़दमे, सुशांत मामले में शिव सेना का भाजपा पर पलटवार
जनादेश के आरडीटी शो में बीबीसी के पूर्व संवाददाता राम हत्त त्रिपाठी चर्चा कर रहे हैं हाथरस कांड में साजिश…
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जब राजीव गांधी से मिला
राजीव गांधी से त्रिलोक दीप जी की पहली मुलाकात स्मरणीय थी। और दूसरी मुलाकात भी तय थी लेकिन उनकी हत्या…
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पत्रकारों के बीमा का दायरा बढ़ाए सरकार
फज़ल इमाम मल्लिक। पत्रकारिता भी संकट में है और पत्रकार भी। पत्रकारिता वर्तमान परिदृश्य सत्ता प्रतिष्ठानों के आसपास घूम रही…
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