मीडिया जगत
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इमर्जेंसी : जब काग़ज़ के पुर्ज़े ही क़ीमती स्मृति चिन्ह बन जाते हैं !
-श्रवण गर्ग, पूर्व सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नई दुनिया पच्चीस जून ,1975 का दिन।पैंतालीस साल पहले।देश में ‘आपातकाल’ लग चुका था।हम…
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इंदिरा गांधी चुनाव केस, जब रिपोर्टर हाईकोर्ट की छत से कूद गया
राम दत्त त्रिपाठी, राजनीतिक विश्लेषक 12 June 1975 तब आज की तरह टीवी चैनल्स नहीं थे. मोबाइल फ़ोन और इंटर्नेट…
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वे दिन वे लोग : राव बीरेंद्र सिंह की साफ़गोई
— त्रिलोक दीप, वरिष्ठ पत्रकार राव बीरेंद्र सिंह मेरे बहुत अच्छे मित्र थे। बेशक़ वह कई बार केंद्रीय मंत्री भी…
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यादों के झरोखे से : किस्से अटल जी के
त्रिलोक दीप , वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली इस फोटो की एक दिलचस्प कहानी है। गाहेबगाहे मैं अटल बिहारी वाजपेयी जी से…
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गिरीश कारनाड को याद करते हुए : कुछ पल गिरीश के साथ,
डा मोहम्मद आरिफ़, वाराणसी बात 1990 के दशक की है जब मैं प्रो.इरफान हबीब के एक आमंत्रण पर अलीगढ़ मुस्लिम…
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How Media Failed in an Hour of Crisis
Prof. Pradeep Mathur, Delhi The battle against Corona Virus continues and by all accounts it is going to be…
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Social Media As an Indicator To Judge People’s Mood
Prof. Pradeep Mathur Whatever you may call me, an old-timer or a puritan I am among those who do not…
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इलाहाबाद की पत्रकारिता का स्वर्णिम इतिहास
वीरेंद्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार, प्रयागराज पत्रकारिता का स्वर्णिम इतिहास इलाहाबाद वर्तमान में प्रयागराज में मिलता है। “प्रयाग प्रदीप” उर्दू का…
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पत्रकारिता के देवता कौन हैं?
डा चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज , मुंबई से आज पत्रकारिता दिवस है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था में राज्य को सतत कल्याण की ओर उन्मुख…
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